कटनी। जिले में पुलिस कप्तान बदलने के साथ जिस सख्ती और सुधार की उम्मीद जगी थी, वह अब धुंधली पड़ चुकी है। हालात यह हैं कि कटनी की कानून व्यवस्था इस समय वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। अपराधियों में खाकी का खौफ खत्म हो चुका है, जबकि आम जनता पुलिसिया कार्यशैली से सहमी हुई है। कप्तान के आदेश कागजों पर गरजते हैं, लेकिन जमीन पर मातहतों की मनमानी और जुगाड़ तंत्र हावी है।
लाइन अटैचमेंट: सजा या मलाईदार पोस्टिंग का ब्रेक?
जिले में “लाइन अटैच” की कार्रवाई अब मजाक बन चुकी है। किसी विवाद या शिकायत के बाद अधीनस्थों को लाइन भेज दिया जाता है, लेकिन यह सजा नहीं बल्कि कुछ दिनों की औपचारिक छुट्टी साबित हो रही है। चंद दिनों बाद वही अधिकारी फिर किसी मलाईदार थाने या चौकी में तैनात नजर आते हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या कार्रवाई सुधार के लिए होती है या सिर्फ जनता का गुस्सा शांत करने के लिए?
चाकूबाजी, हत्या और अवैध कारोबार से थर्राया जिला
कटनी में चाकूबाजी, मारपीट, सट्टा, अवैध शराब, चोरी और हत्या जैसे मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। दूसरी तरफ पुलिस की सख्ती का निशाना अक्सर आम नागरिक बन रहे हैं। चालानी कार्रवाई और छोटी-मोटी धरपकड़ में व्यस्त सिस्टम बड़े अपराधियों पर ढीला नजर आता है।
अनुशासन पर भारी सिफारिश का दबाव
पुलिस विभाग का अनुशासन रसूखदारों की सिफारिशों के नीचे दबता दिख रहा है। जब विभाग के भीतर ही सजा का डर नहीं बचेगा, तो सड़कों पर गुंडागर्दी करने वालों को कानून का खौफ कौन दिखाएगा? जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या पूरा सिस्टम अब जुगाड़ और सेटिंग के भरोसे चल रहा है?
जनता के सवाल, प्रशासन के लिए चुनौती
- दिखावटी कार्रवाई: लाइन हाजिर कर वाहवाही, फिर कुछ दिन बाद बहाली।
- आम आदमी पर सख्ती: बदमाश खुले घूम रहे, जनता पर रौब जारी।
- ढहती व्यवस्था: कप्तान बदले, लेकिन थानों का ढर्रा जस का तस।
- कमजोर खाकी: अपराधियों में डर खत्म, जनता में भरोसा खत्म।
कटनीवासियों का कहना है कि अब कागजी कार्रवाई नहीं, जमीनी पुलिसिंग चाहिए। जिले को सेटिंग वाली व्यवस्था नहीं, सुरक्षा देने वाली सख्त और निष्पक्ष खाकी चाहिए। अगर यही हाल रहा, तो कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल और तेज होंगे।























