रविवार, 8 फ़रवरी 2026

कटनी नगर निगम कंगाल, विकास कार्य ठप — पार्षद राजेश भास्कर का बड़ा हमला, महापौर परिषद की आपात बैठक की मांग


कटनी।
नगर पालिक निगम कटनी की वित्तीय हालत अब “चिंताजनक” नहीं बल्कि खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। आय–व्यय के बीच गहराता असंतुलन, बेकाबू स्थापना व्यय, उपभोक्ता प्रभारों की अव्यवस्था, संपत्तिकर व अन्य करों की कमजोर वसूली और शासन से मिलने वाली अनुदान राशि पर रोक—इन सभी कारणों ने मिलकर नगर निगम को आर्थिक दलदल में धकेल दिया है। नतीजा यह है कि शहर और वार्डों में विकास एवं निर्माण कार्य लगभग पूरी तरह ठप हो चुके हैं।


हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 66 एवं 67 के तहत नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का निगम का वैधानिक दायित्व भी प्रभावित हो रहा है। सड़क, नाली, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था जैसे बुनियादी कार्य धनाभाव के कारण अधर में लटके पड़े हैं, जबकि निगम प्रशासन निष्क्रिय दर्शक बना हुआ है।

सूत्रों के मुताबिक निगम में अत्यधिक स्थापना व्यय और उपभोक्ता प्रभारों के अव्यवस्थित निर्धारण ने राजस्व व्यवस्था की कमर तोड़ दी है। वहीं धारा 132 से 136 के अंतर्गत संपत्तिकर के युक्तियुक्तकरण और प्रभावी वसूली न होने से निगम की आय में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। कर वसूली में लापरवाही के चलते शासन द्वारा अनुदान राशि रोके जाने से हालात और ज्यादा विस्फोटक बनते जा रहे हैं।


इस गंभीर स्थिति को लेकर पार्षद राजेश भास्कर ने निगम प्रशासन पर सीधा और तीखा हमला बोला है। उन्होंने महापौर एवं आयुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि अनावश्यक स्थापना व्यय, व्यापार अनुज्ञा और उपभोक्ता प्रभारों की अव्यवस्था ने नगर निगम को आर्थिक संकट में झोंक दिया है, जिसका सीधा खामियाजा शहर की जनता भुगत रही है।

पार्षद भास्कर ने स्पष्ट कहा कि आय की कमी के कारण वार्ड स्तर पर पहले से स्वीकृत विकास एवं निर्माण कार्य ठप पड़े हैं। इससे नागरिकों में जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा असंतोष पनप रहा है और निगम की साख लगातार गिरती जा रही है। यदि समय रहते ठोस और कड़े फैसले नहीं लिए गए तो हालात पूरी तरह हाथ से निकल जाएंगे।

उन्होंने स्थापना व्यय की तत्काल समीक्षा, उपभोक्ता प्रभार एवं संपत्तिकर का युक्तियुक्तकरण, कर वसूली को सख्ती से लागू करने और शासन से रोकी गई अनुदान राशि को तत्काल बहाल कराने की मांग की है। साथ ही इस पूरे मामले को महापौर परिषद की आपात बैठक की कार्यसूची में शामिल कर त्वरित निर्णय लेने पर जोर दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर निगम प्रशासन इस गंभीर वित्तीय संकट को भी फाइलों, बैठकों और औपचारिकताओं में दबा देगा, या फिर ठोस और जिम्मेदार फैसले लेकर निगम को कंगाली की राह से वापस लाने की हिम्मत दिखाएगा। कटनी की जनता जवाब मांग रही है।

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