सोमवार, 29 दिसंबर 2025

थाना या दलाली केंद्र? मुचलके पर रिहाई की कीमत तय करते एएसआई का वीडियो वायरल

थाना या दलाली केंद्र? मुचलके पर रिहाई की कीमत तय करते एएसआई का वीडियो वायरल, 

थाने के भीतर रिश्वत का रेट कार्ड, वीडियो ने उधेड़ी खाकी की परतें

कटनी। जिले में कानून का राज और सख्ती के दावों के बीच बहोरीबंद थाना से सामने आया वायरल वीडियो पुलिस तंत्र की साख को ज़मीन पर पटकने के लिए काफी है। वीडियो में थाने में पदस्थ एएसआई संतराम गोटिया आरोपी को मुचलके पर छोड़ने के बदले पैसों की खुलेआम सौदेबाज़ी करते और 5000 व 3000 रुपये लेने की बात खुद स्वीकारते नजर आते हैं। इतना ही नहीं, वह यह कहते भी सुने जा रहे हैं—“पैसों की बात फोन पर थोड़ी ना की जाती है”—यह कथन किसी एक कर्मचारी की नहीं, बल्कि थाने के भीतर पनप चुकी भ्रष्ट मानसिकता का आईना है।

यह मामला ऐसे वक्त में सामने आया है, जब जिले में ईमानदार पुलिस कप्तान के नेतृत्व में अपराध नियंत्रण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गंभीर अपराधों में भी रियायत और पैसे के दम पर राहत का खेल बेरोकटोक चल रहा है। सवाल उठता है—
क्या कटनी में अब न्याय कानून से नहीं, नकद से मिलता है?
क्या थाने न्यायालय नहीं, सौदेबाज़ी के काउंटर बन चुके हैं?

वीडियो ने यह भी उजागर किया है कि निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल है। अगर एक एएसआई कैमरे के सामने इस तरह रिश्वत की बात स्वीकार कर रहा है, तो बिना कैमरे के कितने सौदे रोज़ तय होते होंगे, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं। यह केवल एक अधिकारी का मामला नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सड़ांध है, जो अपराधियों को संरक्षण और आम नागरिक को अपमान दे रही है।

अब सवाल कार्रवाई का है।
क्या एएसआई पर तत्काल निलंबन, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर, और स्वतंत्र जांच होगी?
या फिर यह भी बाकी मामलों की तरह जांच के नाम पर दबा दिया जाएगा?

जनता का आक्रोश साफ है—
कानून या सौदा—एक को चुनना होगा।
अगर इस वायरल वीडियो के बाद भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लिया जाएगा कि भ्रष्टाचार को मौन संरक्षण प्राप्त है और खाकी ने खुद अपनी विश्वसनीयता मुचलके पर छोड़ दी है

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