सोमवार, 29 दिसंबर 2025

घर में घुसा बाघ, आदिवासी युवक पर जानलेवा हमला

पनपथा बफर जोन में दहशत—वन विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

उमरिया। पनपथा टाइगर रिज़र्व के बफर जोन अंतर्गत बेल्दी बीट से सटे ग्राम बेल्दी में मंगलवार को बाघ का आतंक खुलकर सामने आ गया। जंगल से भटककर बस्ती में घुसे बाघ ने घर के भीतर घुसकर एक आदिवासी व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों में आक्रोश उफान पर है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गोपाल पिता हेतराम कोल (उम्र 52 वर्ष), निवासी पडवार, अपनी बहन से मिलने बेल्दी गांव आया था। इसी दौरान अचानक बाघ बस्ती में घुस आया और गोपाल पर झपट पड़ा। हमले में बाघ ने उसका पैर बुरी तरह चबा लिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। ग्रामीणों की मदद से घायल को पहले बरही अस्पताल पहुंचाया गया, जहां हालत नाजुक देखते हुए डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।


घटना के बाद गांव में बाघ की निरंतर मूवमेंट से भय का माहौल बना हुआ है। महिलाएं और बच्चे घरों में दुबकने को मजबूर हैं, जबकि खेतों और रास्तों पर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और सावधानी बरतने की अपील की, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अपील से नहीं, ठोस कार्रवाई से जान बचेगी

ग्रामीणों ने सीधे तौर पर वन विभाग की घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि न तो नियमित सर्चिंग होती है, न ही बाघों की प्रभावी निगरानी। यही वजह है कि बाघ बार-बार जंगल छोड़कर बस्तियों तक पहुंच रहे हैं और आदिवासी व ग्रामीण उनकी कीमत चुका रहे हैं। सवाल यह भी है कि बफर जोन में बसे गांवों की सुरक्षा के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और रात्री गश्त आखिर कहां है?

फिलहाल बाघ की दस्तक के बाद वन विभाग की टीम सक्रिय होने का दावा कर रही है और लोगों को सतर्क किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब तक बाघ को सुरक्षित तरीके से ट्रेस, रेस्क्यू या नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक बेल्दी और आसपास के गांवों पर खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोषियों पर कार्रवाई, स्थायी निगरानी व्यवस्था, और पीड़ित को तत्काल मुआवजा दिया जाए—वरना अगला हमला किसी और की जान ले सकता है।

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