बहोरीबंद थाने में भ्रष्टाचार की खुली स्वीकारोक्ति, ASI निलंबित; थाना प्रभारी पर चुप्पी ने एक बार फिर कार्यवाही पर खड़े किए तीखे सवाल
कटनी। दिनांक 29 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने कटनी पुलिस की कथित ईमानदारी, अनुशासन और सख्ती के दावों की परतें उधेड़ कर रख दी हैं। वीडियो में थाना बहोरीबंद में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) संतलाल गोटिया न केवल भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और रिश्वत की बात स्वीकार करता नजर आता है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल छोड़ जाता है।
वीडियो में यह साफ सुनाई देता है कि थाने में आने वाले फरियादियों को जानबूझकर घंटों बैठाया जाता था, मामलों को लटकाने के लिए विलंबकारी नीति अपनाई जाती थी और फिर राहत या कार्रवाई के बदले पैसों की मांग की जाती थी। यह आचरण न सिर्फ कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि खाकी की गरिमा पर सीधा हमला है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक कटनी ने ASI संतलाल गोटिया को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन, असंनिष्ठ आचरण, गंभीर कदाचरण एवं आशोभनीय व्यवहार का दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र कटनी में पदस्थ किया है।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वीडियो में सामने आए तथ्य इतने गंभीर पाए गए कि आरोपी अधिकारी का आचरण विभागीय मर्यादाओं के सर्वथा विपरीत और संदिग्ध प्रकृति का माना गया।
लेकिन यहीं से यह मामला और ज्यादा विस्फोटक मोड़ ले लेता है।
❗ “टीआई पैसा लेता है, मानेगा थोड़ी” — वीडियो में गूंजता यह वाक्य किस पर भारी?
वायरल वीडियो में ASI खुद यह कहते सुनाई दे रहा है कि
“टीआई पैसा लेता है, मानेगा थोड़ी…”
यह वाक्य आज भी उसी वीडियो में जोर-जोर से गूंज रहा है, जिसे देखकर पुलिस अधीक्षक ने ASI को थाने से हटाकर रक्षित केंद्र भेज दिया। लेकिन सवाल यह है कि—
👉 जिस प्रकार थाना प्रभारी (टीआई) के लिए यह गंभीर आरोप वीडियो में खुलेआम लगाया गया,
👉 उससे न तो कोई जवाब-तलब किया गया,
👉 न ही किसी तरह की प्रारंभिक जांच की घोषणा हुई।
साहब, जरा गौर से उस वीडियो को सुनिए—
जनता के सामने आज भी वही शब्द गूंज रहे हैं और पूरी कार्रवाई पर सवालिया निशान लगा रहे हैं।
❗ कमांड फेल या संरक्षण प्राप्त?
जिस थाने में एक अधीनस्थ अधिकारी बेख़ौफ होकर रिश्वत के रेट तय कर रहा हो, और वीडियो में थाना प्रभारी तक की भूमिका पर सवाल उठ रहे हों—वहां की कमांड या तो पूरी तरह कमजोर है, या फिर इस पूरे खेल को ऊपर से संरक्षण प्राप्त है। यह संरक्षण प्रशासनिक है या किसी सफेदपोश आशीर्वाद का परिणाम—यह जांच का विषय है, लेकिन चुप्पी खुद बहुत कुछ कह रही है।
जनता के बीच यह सवाल अब और तीखा हो चुका है—
क्या सिर्फ एक ASI को निलंबित कर देने से सिस्टम पाक-साफ हो जाएगा?
या फिर यह कार्रवाई असली जिम्मेदारों को बचाने के लिए की गई खानापूर्ति है?
कटनी पुलिस के लिए यह महज़ एक विभागीय आदेश नहीं, बल्कि विश्वसनीयता की खुली कसौटी है।
यदि वायरल वीडियो में उठाए गए थाना प्रभारी और कमांड लेवल के सवालों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच नहीं हुई, तो यह साफ माना जाएगा कि भ्रष्टाचार पर प्रहार नहीं, सिर्फ उसका प्रबंधन किया गया है।

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