शनिवार, 11 अप्रैल 2026

अंधेरे में धरती का सीना चीरते रहे माफिया, प्रशासन की उदासीनता से करोड़ों का राजस्व डूबा — NKJ पुलिस की कार्रवाई

देवराखुर्द में कई दिनों से चल रहा था अवैध मुरुम खनन, हाइवा व पोकलेन सक्रिय; एक हाइवा जब्त, चालक फरार

कटनी। जिले में अवैध खनन का काला खेल एक बार फिर उजागर हुआ है, जहां प्रशासन की कथित उदासीनता के चलते माफिया रात के अंधेरे में धरती का सीना चीरकर करोड़ों के राजस्व को चूना लगाते रहे। मामला NKJ थाना क्षेत्र अंतर्गत देवराखुर्द ग्राम पंचायत का है, जहां बीते कई दिनों से अवैध मुरुम उत्खनन धड़ल्ले से जारी था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

मशीन ऑपरेटर के अनुसार मडई ग्राम पंचायत की ओर बन रही सड़क के नाम पर अवैध रूप से मुरुम निकाला जा रहा था। बिना किसी अनुमति के पोकलेन मशीन और हाइवा के जरिए बड़े पैमाने पर खनन कर शासन को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई जा रही थी।


बीती रात क्षेत्रीय सूचना पर सक्रिय हुई NKJ पुलिस ने मौके पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान एक हाइवा को जब्त कर थाने में खड़ा कराया गया, जबकि पोकलेन मशीन को खदान स्थल पर ही जब्त किया गया। इस दौरान एक अन्य हाइवा का चालक अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।

मौके पर मौजूद मशीन ऑपरेटर से पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ कि कुल 3 हाइवा और एक पोकलेन मशीन के जरिए अवैध खनन किया जा रहा था। इससे साफ है कि खनन का यह खेल संगठित तरीके से बड़े पैमाने पर संचालित हो रहा था।

बताया जा रहा है कि जब्त वाहन और मशीनें मैहर निवासी विनय त्रिपाठी से जुड़ी हैं, 


प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कई दिनों से अवैध खनन जारी था, तो जिम्मेदार प्रशासनिक अमला आखिर क्यों चुप बैठा रहा? करोड़ों के राजस्व की क्षति होती रही और अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।


संरक्षण के बिना संभव नहीं इतना बड़ा खेल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना संरक्षण के इस तरह का अवैध खनन संभव नहीं है। ऐसे में पूरे नेटवर्क और संभावित संरक्षणकर्ताओं की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है।


पुलिस का बयान
NKJ थाना प्रभारी ने बताया कि कार्रवाई नियमानुसार की गई है और जब्त वाहनों व मशीन के संबंध में खनिज विभाग को सूचित कर दिया गया है। साथ ही, मामले में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।


जन-जीवन पर मंडरा रहा खतरा

हालांकि जिस तरह से बेपरवाह होकर अवैध खनन किया जा रहा था, उससे मूक पशुओं सहित आम जनता की जान पर भी खतरा मंडरा रहा था। गहरी खुदाई, भारी मशीनों की आवाजाही और असुरक्षित हालात किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहे थे।

👉 जनता का सवाल: आखिर कब तक यूं ही लुटता रहेगा सरकारी खजाना और कब जागेगा प्रशासन?

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