बुधवार, 7 जनवरी 2026

ढीठ शराब माफिया, बेशर्म जिम्मेदार — जिले में फैलता अवैध शराब का जाल, महिलाएँ खुद अवैध शराब पकड़ कर बोरी में भरकर पहुँचीं एसपी दफ्तर

कटनी। जिले में अवैध शराब माफिया अब कारोबार नहीं, खुली गुंडागर्दी और दहशत चला रहा है। गांव-गांव ज़हर परोसा जा रहा है, विरोध करने वालों को धमकाया जा रहा है, मारपीट, झगड़े और घरेलू हिंसा रोज़मर्रा की सच्चाई बन चुकी है—लेकिन जिम्मेदारों की आंखों पर मोटी पट्टी बंधी हुई है। यह किसी से छुपा नहीं कि शराब माफिया और जिम्मेदारों का गठजोड़ ही इस काले धंधे की सबसे मजबूत ढाल बना हुआ है।

इस शर्मनाक व्यवस्था का जीता-जागता सबूत तब सामने आया, जब स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र के देवरी मवई गांव की महिलाओं का सब्र पूरी तरह टूट गया। बार-बार थाने के चक्कर, लिखित शिकायतें और गुहार लगाने के बावजूद जब कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खोखले आश्वासन मिले, तो महिलाओं ने वही किया जो सिस्टम को करना चाहिए था—अवैध शराब खुद पकड़ी, बोरी में भरी और सीधे एसपी कार्यालय जा धमकीं


महिलाओं का आरोप बेहद गंभीर है—पुलिस को सब पता है कि कौन बेच रहा है, कहां से शराब आ रही है और किसके संरक्षण में बिक रही है, फिर भी जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं। नतीजा यह है कि माफिया बेलगाम हो चुके हैं, गांवों का माहौल नर्क बन गया है और परिवार बर्बादी की कगार पर खड़े हैं। सवाल यह नहीं कि शराब बिक रही है—सवाल यह है कि किसके इशारे पर बिक रही है?

जिले के कई हिस्सों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि अवैध शराब कारोबारी ग्रामीणों से उलझते हैं, मारपीट करते हैं, खुलेआम धमकाते हैं, लेकिन कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं देती। जो आवाज़ उठाता है, उसे चुप कराने की कोशिश होती है और जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से बचने में माहिर बने हुए हैं

हालांकि कुछ समय पूर्व ही शराब माफियाओं द्वारा स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र में ही ग्रामीणों पर गाड़ी चढ़ाकर कुचलने की कोशिश की गई थी विरोध हुआ मामला दर्ज हुआ पर शराब माफिया जमानत में बाहर इसके बावजूद भी नही थम रही शराब की अवैध बिक्री ,

महिलाओं के एसपी दफ्तर पहुंचने के बाद अफसरों ने एक बार फिर संज्ञान और सख्त कार्रवाई का रटा-रटाया भरोसा जता दिया। लेकिन अब जनता को भरोसे नहीं, ठोस नतीजे चाहिए
यह घटना पूरे सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है—जहां कानून मूकदर्शक, जिम्मेदार बेशर्म और अपराधी ढीठ बने बैठे हैं।
अब भी अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो साफ मान लिया जाएगा कि जिले में कानून नहीं, शराब माफिया का राज चलता है—और इसकी जवाबदेही तय करने से कोई नहीं बच पाएगा।

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