रातों-रात धरती की कोख चीर दी गई, सैकड़ों गाड़ियों में खनिज गायब—संरक्षण के बिना असंभव
कटनी। जिले की नवीन नगर परिषद उमरियापान में खनिज माफिया ने कानून, शासन और प्रशासन — तीनों को खुलेआम चुनौती दे दी है। उमरियापान थाना क्षेत्र के ग्राम इटवा में नहर से सटी जमीन पर उच्च गुणवत्ता वाले बेशकीमती खनिज (बॉक्साइट) का अवैध उत्खनन रातों-रात भारी-भरकम मशीनों से किया गया। धरती की कोख को इस कदर नोचा गया कि करीब सैकड़ों गाड़ियों में बॉक्साइट भरकर बाहर भेज दिया गया।
यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि सुनियोजित खनिज घोटाला है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस अवैध उत्खनन को किसी स्थानीय लोगों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया। सवाल यह है कि जब पूरी रात मशीनें गरजती रहीं, ट्रकों की कतारें दौड़ती रहीं, तब पुलिस और प्रशासन आखिर आंखें मूंदे क्यों बैठे रहे?
सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि इतनी भारी मात्रा में खुदा बॉक्साइट आखिर किसे बेचा गया?
यह मानना नामुमकिन है कि सैकड़ों ट्रकों में खनिज निकालकर उसे चोरी-छिपे बेच दिया गया और किसी को भनक तक न लगी। बिना खरीदार, बिना तौल, बिना रॉयल्टी, बिना ट्रांजिट परमिट और बिना संरक्षण के ऐसा कारोबार किसी भी हाल में संभव नहीं।
स्पष्ट है कि यह लूट सिर्फ उत्खनन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके पीछे अवैध परिवहन, अवैध बिक्री और मजबूत खनिज नेटवर्क पहले से सक्रिय था। यानी मौके से लेकर बाजार तक खनिज माफिया का पूरा तंत्र बेखौफ काम कर रहा था।
अब प्रशासन के सामने दो ही सच्चाई बचती हैं—
👉 या तो जिम्मेदार अधिकारी अक्षम और घोर लापरवाह हैं
👉 या फिर यह माना जाए कि खनिज माफिया को खुला संरक्षण प्राप्त है
❓ क्या बिना पुलिस-प्रशासन की जानकारी के सैकड़ों ट्रक खनिज लेकर निकल सकते हैं?
❓ थाना और खनिज विभाग सिर्फ कागज़ों में ही सक्रिय हैं?
❓ क्या जांच में अवैध खनन और खनिज खरीदने वाले रसूखदार चेहरे भी बेनकाब होंगे?
गश्त सिर्फ फाइलों में? पुलिस और खनिज विभाग की भूमिका संदिग्ध
जिस क्षेत्र में नियमित रात्रि गश्त और निगरानी का दावा किया जाता है, वहीं रात-रात भर मशीनें चलीं, ट्रक दौड़ते रहे और विभागीय अमला नदारद रहा।
यह गश्त ज़मीन पर ही चल रही थी क्या या फिर फिर खनिज माफिया को पहले से “सुरक्षित रास्ता” दे दिया गया था?
कलेक्टर बताएं— इतनी बड़ी अवैध गतिविधि के बावजूद जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था क्यों फेल रही?
एसपी जवाब दें— बिना पुलिस संरक्षण के क्या इतना बड़ा खनिज परिवहन संभव है?
यदि इस मामले में मशीनों की जब्ती, परिवहन मार्गों की जांच, खरीदारों की पहचान और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लिया जाएगा कि उमरियापान खनिज माफिया के लिए सुरक्षित ज़ोन बन चुका है।
यह सिर्फ अवैध उत्खनन नहीं, बल्कि सरकारी संपदा की खुली लूट और प्रशासनिक तंत्र की सरेआम नाकामी का ज्वलंत उदाहरण है।

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