जानलेवा पूछताछ? या संयोग से मौत
कटनी। कटनी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम सिमरा निवासी 65 वर्षीय वृद्ध की वन विभाग की हिरासत में पूछताछ के बाद मौत ने पूरे तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर पूछताछ के नाम पर मारपीट, मानसिक दबाव और अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हुए इसे प्रताड़ना से हुई मौत बताया है। वहीं विभाग इसे महज कानूनी कार्रवाई और अचानक तबीयत बिगड़ने का मामला बताकर पल्ला झाड़ता नजर आ रहा है।
जानकारी के अनुसार सिमरा निवासी वृद्ध फूलचंद के पास से कथित रूप से जंगली सूअर का मांस बरामद होने के बाद वन विभाग ने उसे उसके पुत्र सूदीन कोल और लक्ष्मण के साथ हिरासत में लेकर जंगली सूअर के शिकार के मामले में पूछताछ शुरू की। तीनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया, लेकिन सवाल यह है कि कानूनी पूछताछ अचानक जानलेवा कैसे हो गई?
बताया जाता है कि बुधवार को हिरासत में पूछताछ के दौरान अचानक फूलचंद की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद वन विभाग की टीम उसे माधवनगर स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां से हालत गंभीर बताकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। देर शाम सुधार न होने पर जबलपुर रेफर किया गया, लेकिन इससे पहले ही जब वन विभाग का अमला और परिजन उसे जबलपुर ले जा रहे थे, रास्ते में उसकी मौत हो गई।
मृतक के परिजनों का आरोप है कि पूछताछ के दौरान फूलचंद के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, उसे डराया-धमकाया गया और लगातार दबाव में रखा गया, जिससे उसकी हालत बिगड़ी और अंततः उसकी जान चली गई। परिजनों का सवाल है कि यदि पूछताछ सामान्य थी तो एक वृद्ध की हालत इतनी गंभीर कैसे हो गई कि उसे तीन अस्पतालों में घुमाना पड़ा और अंततः रास्ते में मौत हो गई?
वहीं वन विभाग की ओर से सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा जा रहा है कि वृद्ध की तबीयत अचानक खराब हुई और विभाग ने उसे समय पर इलाज दिलाने का प्रयास किया। हालांकि विभाग के इस बचाव को मृतक के परिजन मानने को तैयार नहीं हैं।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या यह एक बीमारी से हुई सामान्य मौत थी या हिरासत में हुई प्रताड़ना का नतीजा? इसका जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
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