करौंदी (कटनी)। महर्षि आश्रम भारत के भौगोलिक केंद्र ब्रह्मस्थान करौंदी में विश्वविख्यात योग गुरु की 109वीं जन्मजयंती “ज्ञान युग दिवस समारोह” के रूप में अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक गुरु पूजन, दीप प्रज्वलन एवं वैदिक पंडितों द्वारा शांति पाठ के साथ हुई। अतिथियों का पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए आश्रम प्रभारी अरविंद सिंह ने कहा कि आज का दिन महर्षि जी के वेद ज्ञान, ध्यान, शिक्षा और संस्कृति को स्मरण करने तथा उसे अपने जीवन में आत्मसात करने का अवसर है। उन्होंने महर्षि के जीवन परिचय और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि जी को किसी औपचारिक डिग्री की आवश्यकता नहीं थी—उनका व्यापक ज्ञान और विश्वव्यापी प्रभाव इसका प्रमाण है।
महर्षि जी का मानना था कि सारा ज्ञान हमारी चेतना में निहित है और उसी चेतना के माध्यम से ज्ञान की प्राप्ति होती है—जिसे अनेक शोधों ने प्रमाणित किया है।
अरविंद सिंह ने भावातीत ध्यान (ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन) के महत्व पर बल देते हुए कहा कि इसके नियमित अभ्यास से व्यक्ति तनाव, मानसिक परेशानियों और असंतुलन से मुक्ति पा सकता है।
अतिथियों के प्रेरक उद्बोधन के पश्चात धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि पद्मेश गौतम, भाजपा मंडल अध्यक्ष आशीष चौरसिया, समाजसेवी राजेश व्यौहार, गोविंद प्रताप सिंह, विजय दुबे, जनपद अध्यक्ष संतोष दुबे, खेल समिति अध्यक्ष आशीष जी, महर्षि वैदिक विश्वविद्यालय के प्राध्यापक मानवेंद्र पांडे, आश्रम प्रभारी रतीभान सिंह, व्यवस्था प्रभारी बलराम भारद्वाज, रामदरस यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक, मीडिया प्रतिनिधि, आश्रम के आचार्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संदेश: ज्ञान, ध्यान और चेतना—यही है महर्षि का मार्ग, यही है ज्ञान युग का संदेश।

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