शनिवार, 3 जनवरी 2026

आंकड़ों की चकाचौंध में छुपा डर: 2025 में कार्रवाई का शोर, अपराध क्यों बेकाबू?


“प्रेस नोट मजबूत, ज़मीनी हकीकत डरावनी”

कटनी। वर्ष 2025 की विदाई पर कटनी पुलिस ने सालभर की कार्यवाहियों के आंकड़े सार्वजनिक कर यह दिखाने की कोशिश की कि जिले में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही। ऑपरेशन शिकंजा, ड्रिंक एंड ड्राइव, कांबिंग गश्त और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत हजारों कार्रवाइयों को उपलब्धि के रूप में पेश किया गया।

लेकिन इन्हीं चमकदार आंकड़ों के पीछे छुपा सच यह है कि गंभीर अपराधों के मोर्चे पर हालात उतने मजबूत नहीं दिखते, जितना प्रेस नोट में दर्शाया गया है।

कार्रवाई का पहाड़, लेकिन अपराध का ग्राफ आसमान पर

पुलिस विभाग के आंकड़ों अनुसार—

ऑपरेशन शिकंजा – 3929

ड्रिंक एंड ड्राइव – 2105

कांबिंग गश्त – 14384

मोटर व्हीकल एक्ट – 25818

जुआ-सट्टा – 710

👉 इन आंकड़ों से साफ है कि चालान, चेकिंग और अभियान स्तर पर पुलिस बेहद सक्रिय रही,

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता अपराध की जड़ों पर वार कर सकी, या सिर्फ संख्या बढ़ाने तक सीमित रही?

दो साल के आंकड़े, सिस्टम की पोल खोलते हुए

जब इन्हीं दावों की तुलना गंभीर अपराधों के आंकड़ों से की जाती है, तो तस्वीर चौंकाने वाली सामने आती है—

हत्या

2024: 23 हत्या → 2025: 32 हत्याएं

हत्या का प्रयास 

2024: 10 हत्या के प्रयास→ 2025: 47 हत्याओं के प्रयास

लूट

2024: 03 लूट → 2025: 05 लूट 

गृहभेदन

2024: 82 गृहभेदन → 2025: 140 गृहभेदन

👉 हत्या के प्रयास के मामलों में चार गुना उछाल इस बात का संकेत है कि अपराधियों का मनोबल कम होने के बजाय और मजबूत हुआ।

👉 गृहभेदन के 140 मामले यह सवाल छोड़ जाते हैं कि क्या आम नागरिक का घर अब भी सुरक्षित है?

आंकड़े ही सवाल बनकर खड़े हैं

जब 14 हजार से ज्यादा कांबिंग गश्त हुई, तो चोरी और गृहभेदन क्यों बढ़े?

25 हजार से ज्यादा मोटर व्हीकल एक्ट की कार्रवाई के बावजूद अपराधियों के हौसले क्यों बुलंद रहे?

क्या पुलिसिंग का ज़ोर सिर्फ चालान और दिखावटी अभियानों पर रहा, जबकि संगठित और हिंसक अपराध फिसलते रहे?

प्रेस नोट बनाम जनता की ज़मीनी हकीकत

जिले में आम चर्चा यह रही कि

काग़ज़ों में कानून-व्यवस्था मजबूत है, लेकिन सड़कों, मोहल्लों और घरों में डर की मौजूदगी बनी रही।

कानून-व्यवस्था के जानकार मानते हैं कि आंकड़ों की भरमार तब तक बेमानी है, जब तक गंभीर अपराधों पर ठोस और स्थायी अंकुश न दिखे।

2026: बदलाव की उम्मीद या आंकड़ों का नया खेल?

वर्ष 2025 का अनुभव यह साफ संकेत देता है कि

अभियानों की संख्या नहीं, उनके परिणाम ही असली पैमाना होते हैं।

जनता की अपेक्षा है कि वर्ष 2026 में पुलिसिंग—

सिर्फ प्रेस नोट और आंकड़ों की सूची न बने

बल्कि अपराधियों के मन में डर और नागरिकों के मन में भरोसा पैदा करे

क्योंकि जब आंकड़े खुद डर पैदा करने लगें, तो सवाल उठना सियासत नहीं—जनहित की ज़रूरत बन जाता है।

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