मंगलवार, 26 मई 2026

“लघु वृंदावन” में नशे का कहर… उधर पुलिस का “ऑपरेशन शिकंजा”, इधर बच्चों को बचाने रोती हुई एसपी दफ्तर पहुंचीं महिलाएं

कटनी। कभी भगवान श्री राधा-कृष्ण की भक्ति और धार्मिक आस्था के लिए पहचाने जाने वाला बांधा इमलाज गांव आज नशे के जहर से तड़प रहा है। “लघु वृंदावन” कहलाने वाले इस गांव की गलियों में अब भजन की आवाज कम और शराबियों के झगड़े ज्यादा सुनाई देने लगे हैं। गांव की मांओं की आंखों में अब अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डर साफ दिखाई देने लगा है।

मंगलवार को रीठी थाना क्षेत्र के बांधा इमलाज से एक दर्जन से अधिक महिलाएं और ग्रामीण जनसुनवाई में एसपी कार्यालय पहुंचे। किसी की आंखों में आंसू थे, कोई गुस्से में था, तो कोई अपने बच्चों को नशे की दलदल से बचाने की आखिरी उम्मीद लेकर आया था। महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में खुलेआम अवैध शराब और गांजे का कारोबार चल रहा है और युवा पीढ़ी धीरे-धीरे बर्बादी की ओर धकेली जा रही है।


फूलबाई यादव, घीसल काच्छी, लता चौधरी सहित महिलाओं ने प्रशासन से कहा —
“हम अपने बच्चों को बचाने आए हैं… गांव में नशे ने घर-परिवार बर्बाद कर दिए हैं। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ी खत्म हो जाएगी।”

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायतें हुईं, छापेमारी भी हुई, लेकिन कुछ दिन बाद फिर वही शराब माफिया सक्रिय हो जाते हैं। महिलाओं ने यह तक कह दिया कि अगर सख्त कार्रवाई होती तो गांव में दोबारा शराब और गांजा बिकने की हिम्मत नहीं होती।

इसी बीच कटनी पुलिस जिलेभर में “ऑपरेशन शिकंजा” चलाकर शराब माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर रही है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में पूरे जिले में एक साथ रेड कार्रवाई की गई, जिसमें 64 शराब कारोबारियों पर आबकारी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज हुए। पुलिस ने 207.31 लीटर अवैध शराब जब्त कर करीब 78 हजार 950 रुपये की शराब बरामद की।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिले से नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करने अभियान चलाया जा रहा है। वहीं जब पुलिस और नशा कारोबारियों के कथित लेनदेन के आरोपों पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा —
“यदि किसी पुलिसकर्मी की संलिप्तता के साक्ष्य हैं तो उपलब्ध कराएं, जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं खड़ा है —
जब पुलिस रोज शराब पकड़ रही है, माफियाओं पर केस दर्ज हो रहे हैं, फिर गांवों में नशे का जहर दोबारा कैसे फैल जाता है? आखिर कौन हैं वो चेहरे जो पर्दे के पीछे से इस पूरे नेटवर्क को बचा रहे हैं?

बांधा इमलाज की महिलाएं अब सिर्फ छापेमारी नहीं चाहतीं… वे अपने बच्चों का बचपन वापस मांग रही हैं। क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ शराब बंद कराने की नहीं, बल्कि एक पूरे गांव को बर्बादी से बचाने की है।

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