कटनी। माँ नर्मदा जन्मोत्सव भले ही पूरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास से मनाया जाता हो, लेकिन जिन क्षेत्रों तक माँ का जल पहुँचा है, वहाँ यह पर्व दोहरे उल्लास और गहरी भावनाओं का कारण बनता है। उमरियापान के लिए यह नर्मदा जयंती सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि माँ के आगमन का उत्सव, आस्था की जीत और पीढ़ियों के सपनों के पूरे होने का दिन बन चुकी है।
माँ नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवन, आस्था और संस्कारों की अमर धारा हैं। जहाँ-जहाँ उनका जल पहुँचा है, वहाँ उसने केवल धरती ही नहीं, बल्कि लोगों के मन भी सींचे हैं। नर्मदा नहर परियोजना के अंतर्गत नहर के माध्यम से कुछ वर्ष पूर्व ही माँ नर्मदा का पावन जल उमरियापान पहुँच चुका है, और उसी आशीर्वाद के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर हर वर्ष नर्मदा जयंती पर देखने को मिलता है।
नर्मदा जल के उमरियापान पहुँचते ही क्षेत्र की तस्वीर बदलने लगी। खेतों में हरियाली लौटी, किसानों के चेहरों पर उम्मीद की चमक दिखाई देने लगी। यह केवल सिंचाई का साधन नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे माँ नर्मदा का स्थायी सान्निध्य बन गया, जिसने पूरे क्षेत्र को जलजीवन का भरोसा दिया।
माँ नर्मदा के जलागमन की खुशी में उमरियापान मुख्य मार्ग पर नहर किनारे भक्तजनों द्वारा भव्य माँ नर्मदा मंदिर का निर्माण कराया गया। यह मंदिर आज केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि उस संघर्ष, प्रतीक्षा और अटूट विश्वास का प्रतीक है, जो पीढ़ियों तक इस क्षेत्र के लोगों के मन में जीवित रहा। नर्मदा जल यहां पहुँचने के बाद से ही यहाँ हर वर्ष नर्मदा जयंती दोहरी श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं के साथ मनाई जाती है।
25 जनवरी 2026, नर्मदा जयंती के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजन, हवन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं की उपस्थिति, जयकारों की गूंज और धूप-दीप की सुगंध ने पूरे उमरियापान को आध्यात्मिक वातावरण से भर दिया। कई श्रद्धालुओं की आँखों में भावुकता साफ झलक रही थी—क्योंकि यह दिन उनके लिए माँ के प्रति आभार जताने का दिन था।
श्रद्धालुओं ने माँ नर्मदा को नमन करते हुए सरकार तथा नर्मदा नहर परियोजना से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और श्रमिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि माँ नर्मदा के जल से आज किसानों को दुगनी पैदावार का लाभ मिल रहा है और पूरा क्षेत्र समृद्धि की राह पर निरंतर आगे बढ़ रहा है।

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