कटनी के द्वारका भवन में आयोजित राज्य शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंचीं मंत्री से जैसे ही में दूषित पानी से हुई मौतों और राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल किया गया, उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय विषय बदल दिया। सवाल इंदौर की मौतों पर था, लेकिन मंत्री शिक्षा संघ की गतिविधियों पर बयान देने लगीं। मीडिया द्वारा सवाल दोहराए जाने के बावजूद करीब एक मिनट तक वे उसी विषय पर बोलती रहीं। बयान खत्म होते ही औपचारिक धन्यवाद कहा और बिना जवाब दिए मंच व कार्यक्रम छोड़कर तेजी से निकल गईं—इस दौरान मीडिया के माइक को धक्का लगने की भी चर्चा रही।
इस घटनाक्रम पर कार्यक्रम में मौजूद कटनी सांसद ने कहा कि सरकार इंदौर मामले को लेकर गंभीर है, अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और आगे भी सख्त कदम उठेंगे। हालांकि, जब उनसे मंत्रियों द्वारा सवालों से बचने या मंच छोड़ने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे “इंदौर तक सीमित विषय” बताकर टाल दिया।
इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का मामला अब सरकार की जवाबदेही बनाम राजनीतिक चुप्पी की बहस में बदल गया है। विपक्ष सीधे सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष के मंत्री सवालों से बचते नज़र आ रहे हैं। मंच छोड़कर निकल जाना क्या जवाबदेही से बचने का संकेत है? यह सवाल अब जनता पूछ रही है।

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