शनिवार, 6 जून 2026

मध्यप्रदेश राज्यसभा नामांकन पर बवाल: अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज का भाजपा पर बड़ा हमला

वोट हमारे, प्रतिनिधित्व किसी और का!’: एक दशक से राज्यसभा में ब्राह्मण चेहरा न होने पर भड़का गुस्सा, नेतृत्व से मांगा जवाब

विशेष संवाददाता, भोपाल

मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवारों के नामों के बाद प्रदेश में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने उम्मीदवारों की सूची पर खुलकर नाराजगी जताते हुए भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाज का कहना है कि भाजपा लगातार ब्राह्मण समाज की राजनीतिक उपेक्षा कर रही है और उसे केवल वोट बैंक व संगठन की रीढ़ तक ही सीमित कर दिया गया है।

अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा:

> "जनसंघ के दौर से लेकर भाजपा को खड़ा करने और उसे इस मुकाम तक पहुँचाने (विस्तार देने) में ब्राह्मण समाज की हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लेकिन आज बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उसी समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में पूरी तरह हाशिये पर धकेला जा रहा है।"

 “क्या राज्यसभा के योग्य नहीं कोई ब्राह्मण नेता?”

पुष्पेंद्र मिश्रा ने पार्टी आलाकमान से तीखा सवाल पूछा कि आखिर पिछले एक दशक से मध्यप्रदेश में ब्राह्मण समाज से किसी भी चेहरे को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के योग्य क्यों नहीं समझा जा रहा है?

उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी, लक्ष्मीनारायण शर्मा, रघुनंदन शर्मा, प्रभात झा और शिवप्रताप शुक्ल जैसे दिग्गज नेताओं की विरासत को अब पार्टी में नजरअंदाज किया जा रहा है। समाज ने आश्चर्य व्यक्त किया कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा, अनूप मिश्रा और सुरेश पचौरी जैसे बेहद अनुभवी और कद्दावर नेताओं को भी राज्यसभा के लिए उपयुक्त नहीं माना गया।

 “वोट दो, काम करो... लेकिन सम्मान नहीं?”

ब्राह्मण समाज ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि भाजपा, जिसे कभी 'ब्राह्मण-वैश्य समन्वय' की पार्टी माना जाता था, अब इस वर्ग को केवल चुनाव में वोट देने और संगठन के जमीनी कार्यों तक सीमित रख रही है। जब सम्मान और वास्तविक राजनीतिक भागीदारी (टिकट वितरण) का समय आता है, तब समाज को दरकिनार कर दिया जाता है।

मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी भरे लहजे में कहा:

 स्वाभिमान सर्वोपरि:"ब्राह्मण समाज किसी पद का भूखा नहीं है, लेकिन लगातार हो रहे इस अपमान और उपेक्षा को अनंतकाल तक स्वीकार नहीं किया जाएगा। समाज के स्वाभिमान की भी एक सीमा होती है।"


 राष्ट्रहित बनाम उपेक्षा: समाज ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी बड़े वर्ग की लगातार उपेक्षा स्वीकार्य नहीं हो सकती।

 राजनीतिक गलियारों में हलचल, भाजपा से मांगा स्पष्ट जवाब

अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने अब भाजपा के केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व से मांग की है कि वह मध्यप्रदेश में ब्राह्मण समाज के घटते राजनीतिक ग्राफ और प्रतिनिधित्व पर अपना रुख स्पष्ट करे। साथ ही, भविष्य में इस असंतुलन को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए।

 राज्यसभा चुनाव के नामांकन के ठीक पहले उठे इस सुर ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि क्या भाजपा इस अंदरूनी नाराजगी को गंभीरता से लेते हुए डैमेज कंट्रोल की कोशिश करेगी, या फिर यह सुलगता विवाद आगामी चुनावी समीकरणों पर भारी पड़ेगा? फिलहाल, ब्राह्मण समाज के इस तीखे रुख ने भाजपा खेमे में हलचल तेज कर दी है।


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