कटनी में बेलगाम माफियाराज! चाकूबाजी, सट्टा, शराब और चोरी से दहला शहर — 24 घंटे में चाकूबाजी की तीसरी घटना, पुलिस पर उठे सवाल
कटनी जिले में लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात यह हैं कि शहर के बाजार, कॉलोनियां और सार्वजनिक इलाके अब अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनते जा रहे हैं, जबकि आम जनता भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।
ताजा मामला शहर के सबसे व्यस्त सब्जी मंडी क्षेत्र का है, जहां दिनदहाड़े प्रशांत सोनी पिता विष्णू सोनी (उम्र लगभग 40 वर्ष) पर धारदार चाकू से हमला कर दिया गया। बीच बाजार हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गंभीर रूप से घायल प्रशांत को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस हमले में बुच्चड़, उसकी दो बहनें, एक भांजा और दो अन्य साथी शामिल बताए जा रहे हैं। पुराने विवाद और कहासुनी के बाद मामला खूनी संघर्ष में बदल गया। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
लेकिन बड़ा सवाल सिर्फ इस वारदात का नहीं है। चिंता इस बात की है कि पिछले 24 घंटे में चाकूबाजी की यह तीसरी घटना सामने आई है। आखिर कटनी में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? क्या बदमाशों में पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है?
शहर में लगातार बढ़ रहे जुए, सट्टे और अवैध शराब कारोबार को लेकर भी जनता के बीच भारी आक्रोश है। कुछ दिन पहले दुबे कॉलोनी क्षेत्र में माधवनगर पुलिस ने ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा पकड़ा था, लेकिन उसके बाद भी जिले में सट्टा कारोबार खुलेआम संचालित होने की चर्चाएं थम नहीं रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सट्टा माफियाओं पर इतनी नरमी क्यों?
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब कॉम्बिंग गश्त की रात ही चोर मोबाइल दुकान में लाखों की चोरी कर फरार हो जाते हैं। इससे लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अपराधियों को पुलिस की गतिविधियों की पहले से जानकारी मिल जाती है, या फिर अपराधियों को किसी संरक्षण का भरोसा है?
अब उंगलियां सीधे जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठने लगी हैं। शहर में लगातार बढ़ रही आपराधिक गतिविधियों के बावजूद आखिर ऐसा कौन सा दबाव है जिसके चलते सख्त और प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही? जनता यह सवाल भी पूछ रही है कि यदि जिले में एक ईमानदार पुलिस कप्तान की पदस्थापना के बाद भी खुलेआम जुआ, सट्टा और अवैध कारोबार संचालित हो रहे हैं, तो आखिर संरक्षण किसका है?
कटनी में बढ़ती हिंसा और अपराधों के बीच अब यह सवाल भी गूंजने लगा है —
“आखिर और कितने लोगों के खून के प्यासे हैं सट्टा और शराब माफिया?”
क्योंकि अब मामला सिर्फ अवैध कारोबार का नहीं रह गया, बल्कि इन कारोबारों से जुड़ी हिंसा सीधे लोगों की जान लेने पर उतारू दिखाई दे रही है। युवा पीढ़ी बर्बादी की ओर धकेली जा रही है और शहर का माहौल लगातार असुरक्षित होता जा रहा है।
बुजुर्गों की कही एक पुरानी कहावत इन दिनों कटनी की गलियों में फिर सुनाई देने लगी है —

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