कटनी : बस स्टैंड चौकी में एक श्रमिक के साथ कथित मारपीट और अवैधानिक रूप से निरुद्ध किए जाने का मामला अब पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर आरक्षक क्रमांक 694 अनमोल कुमार एवं कार्यवाहक सहायक उपनिरीक्षक बाल गोविंद प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र संबद्ध कर दिया गया है।
मामला तब सामने आया जब हिरवारा कौड़िया निवासी श्रमिक अविनाश प्रजापति ने शिकायत दर्ज कराई कि बिना किसी प्राथमिक तस्दीक और वैधानिक प्रक्रिया के उसे चौकी में बैठाकर मारपीट की गई। जांच में पुलिसकर्मियों द्वारा गंभीर असंवेदनशीलता, पद के दुरुपयोग और आमजन के प्रति अनुचित व्यवहार की पुष्टि प्रथम दृष्टया सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए नगर पुलिस अधीक्षक को निष्पक्ष जांच सौंपी है।
यदि यह सब चौकी प्रभारी की जानकारी के बिना हुआ, तो यह उनकी निगरानी व्यवस्था और अधीनस्थों पर नियंत्रण की विफलता दर्शाता है। और यदि जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं रोकी गई, तो मामला केवल लापरवाही नहीं बल्कि संरक्षण देने की आशंका भी पैदा करता है।
थाना हो या चौकी — वहां होने वाली हर गतिविधि की जवाबदेही अंततः प्रभारी अधिकारी की मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या विभाग केवल अधीनस्थ कर्मचारियों पर कार्रवाई कर मामले को सीमित करना चाहता है, या फिर नेतृत्व स्तर तक भी जवाबदेही तय होगी?
पुलिस अधीक्षक द्वारा चौकी प्रभारी की भूमिका की जांच कराने के निर्देश दिए जाने के बाद अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। जनता के बीच चर्चा है कि यदि एक श्रमिक के साथ चौकी में ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम नागरिक पुलिस व्यवस्था पर कितना भरोसा करे?

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