एम्बुलेंस जाम में कैद, जनता बेहाल और जिम्मेदार सायरन बजाकर निकाल रहे रास्ता… आखिर व्यवस्था संभालेगा कौन?
कटनी। मिशन चौक ब्रिज से लेकर बरंगवा रोड तक इन दिनों शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। सीवर लाइन प्रोजेक्ट के नाम पर चल रही अव्यवस्थित खुदाई और बिना प्लानिंग के हो रहे निर्माण कार्य ने पूरे मार्ग को “जाम कॉरिडोर” में तब्दील कर दिया है। हालत यह है कि रोजाना हजारों लोग घंटों जाम में फंसकर परेशान हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी केवल औपचारिकताओं में उलझा दिखाई दे रहा है।
सुबह से देर रात तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें आम दृश्य बन चुकी हैं। मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस जाम में सायरन बजाती रह जाती हैं, स्कूली बच्चे धूल और खतरे के बीच निकलने को मजबूर हैं, वहीं नौकरीपेशा और व्यापारी वर्ग रोजाना अव्यवस्था की मार झेल रहा है।
विडंबना यह है कि जिन अधिकारियों के जिम्मे व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी है, वे खुद सायरन बजाकर अपना रास्ता साफ कर निकल जाते हैं। आम नागरिकों के लिए न कोई व्यवस्थित डायवर्जन है, न अतिरिक्त ट्रैफिक बल और न ही ऐसा कोई ठोस प्लान, जिससे लोगों को राहत मिल सके। ऐसा महसूस होने लगा है कि सिस्टम के लिए वीआईपी मूवमेंट ज्यादा जरूरी है, जनता की परेशानी नहीं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट में न सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है और न ही चरणबद्ध कार्ययोजना दिखाई दे रही है। सड़क किनारे फैली निर्माण सामग्री, अधूरी खुदाई और अव्यवस्थित बैरिकेडिंग हर पल दुर्घटना का खतरा बढ़ा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जब वरिष्ठ अधिकारी स्वयं इस अव्यवस्था का सामना कर चुके हैं, तब भी हालात सुधारने के लिए सख्त और प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
शहरवासियों का कहना है कि विकास कार्यों से किसी को आपत्ति नहीं, लेकिन यदि विकास के नाम पर जनता की जिंदगी ही थम जाए तो ऐसे प्रबंधन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब समय केवल निरीक्षण और सायरन का नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाली ठोस व्यवस्था का है, ताकि मिशन चौक से बरंगवा रोड तक राहत लौट सके और शहर फिर से सामान्य रफ्तार पकड़ सके।

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