बुधवार, 13 मई 2026

अंदर सड़ांध, ऊपर विकास का नकाब: वार्ड 27 में नाली निर्माण ने खोली निगम की ‘कागजी गुणवत्ता’ की पोल

पहुंच और पावर के दम पर नियमों की हत्या! लाखों के निर्माण कार्य पर उठे सवाल, वार्डवासियों में आक्रोश

कटनी। नगर निगम के विकास कार्यों की चमकदार तस्वीरों के पीछे जमीनी हकीकत कितनी बदहाल है, इसका ताजा उदाहरण मदन मोहन चौबे वार्ड क्रमांक 27 में पानी की टंकी के पास चल रहे नाली निर्माण कार्य में देखने को मिल रहा है। लाखों रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्य में न केवल गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है, बल्कि तकनीकी नियमों और सफाई व्यवस्था को भी खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुरानी नाली की समुचित सफाई किए बिना ही उसके ऊपर दोनों ओर स्लैब डालकर फीलिंग का कार्य किया जा रहा है। यानी नाली के भीतर वर्षों से जमा गंदगी और सड़ांध जस की तस बनी हुई है और ऊपर से विकास का चमकदार नकाब पहनाकर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि यदि इसी तरह निर्माण कार्य जारी रहा तो आगामी बारिश में जल निकासी पूरी तरह ठप हो सकती है और पूरा इलाका जलभराव व बदबू की चपेट में आ जाएगा।

“पहुंच है हमारी…” कहकर नियमों को दिखाया ठेंगा!

वार्डवासियों का आरोप है कि जब उन्होंने निर्माण कार्य को नियमों और तकनीकी मानकों के अनुरूप कराने की मांग की, तो संबंधित ठेकेदार ने खुलेआम अपनी “पहुंच” और “पावर” का हवाला देते हुए काम जारी रखने की बात कही। इससे लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है। नागरिकों का कहना है कि यदि जनता की शिकायतों को इसी तरह दबाया गया तो विकास कार्यों पर जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

गुणवत्ता पर सवाल, निगम की कार्यप्रणाली कटघरे में

स्थानीय नागरिकों के अनुसार निर्माण स्थल पर न तो उचित बेस तैयार किया जा रहा है और न ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है। करोड़ों के विकास दावों के बीच इस तरह के निर्माण कार्य अब नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कागजों में विकास और जमीनी स्तर पर अव्यवस्था का यह खेल आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है?

महापौर से लेकर निगमायुक्त तक पहुंची शिकायत

मामले की शिकायत महापौर प्रीति संजीव सूरी, निगम अध्यक्ष मनीष पाठक एवं निगमायुक्त तपस्या परिहार तक पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि निगमायुक्त ने संबंधित इंजीनियर को कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। हालांकि अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कार्रवाई केवल फाइलों और निर्देशों तक सीमित रहेगी या फिर नियमों को कुचलने वालों पर वास्तव में कोई सख्त कदम भी उठाया जाएगा।

विकास या भ्रष्ट कार्यप्रणाली का नमूना?

शहर में चर्चा इस बात की है कि यदि विकास कार्यों में इसी तरह गंदगी को दबाकर गुणवत्ता का दिखावा किया जाता रहा, तो जनता का भरोसा भी इन निर्माणों की तरह अंदर से खोखला साबित होगा। फिलहाल वार्ड 27 का यह निर्माण कार्य विकास से ज्यादा नगर निगम व्यवस्था पर उठते सवालों की कहानी बयां कर रहा है।

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