कटनी। जिले की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ बहोरीबंद थाना प्रभारी अखिलेश दहिया को अधीनस्थों पर नियंत्रण न रखने और वसूली की शिकायतों पर तुरंत लाइन हाजिर कर सख्ती का संदेश दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर यातायात थाना प्रभारी रक्षित निरीक्षक राहुल पांडेय पर बार-बार लगते गंभीर आरोपों, पुराने मामलों में आरोप सिद्ध होने और पुलिस मुख्यालय (PHQ) के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना ‘डबल स्टैंडर्ड’ की तस्वीर पेश कर रहा है।
बहोरीबंद में एक्शन, यहां क्यों संरक्षण?
बहोरीबंद थाने में कदाचार और वसूली की शिकायतों पर पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी को हटा दिया।
लेकिन यही सख्ती राहुल पांडेय के मामले में नजर नहीं आती—
जहां:
✔️ शिकायतें लगातार
✔️ पुराने आरोप 2024 की जांच में सिद्ध
✔️ फिर भी फाइल दफन
👉 12 मार्च का PHQ आदेश… 3 हफ्ते बाद भी ‘नो एक्शन’
राहुल पांडेय की बिना अनुमति थाईलैंड यात्रा के मामले में पुलिस मुख्यालय, भोपाल ने दिनांक 12/03/2026 को स्पष्ट निर्देश जारी किए—
👉 अनुशासनात्मक कार्रवाई करें
लेकिन तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी
❌ न कार्रवाई
❌ न कोई आधिकारिक बयान
‘मैनेजमेंट’ का खेल या सिस्टम की नाकामी?
महकमे में चर्चा है कि संबंधित अधिकारी ‘मैनेजमेंट में माहिर’ हैं, और यही वजह है कि हर बार शिकायतों और आदेशों के बावजूद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है।
अगर यह सच है, तो यह सिर्फ एक अधिकारी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की लचर कार्यप्रणाली और पक्षपात को उजागर करता है।
कप्तान की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल
जिले के कप्तान अभिनय विश्वकर्मा, जिन्हें ईमानदार अधिकारी माना जाता है, इस पूरे मामले में अब तक मौन हैं।
जब:
✔️ पुराने आरोप सिद्ध
✔️ नए गंभीर उल्लंघन
✔️ PHQ के स्पष्ट आदेश
तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों?
किस दबाव में खामोश हैं साहब?
साख पर सीधा वार
एक तरफ त्वरित कार्रवाई का दिखावा, दूसरी तरफ गंभीर मामलों में चुप्पी—यह तस्वीर कटनी पुलिस की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार कर रही है।
👉 अब सवाल साफ है—क्या नियम सबके लिए बराबर हैं, या फिर ‘चयनात्मक सख्ती’ का खेल यूं ही चलता रहेगा?

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