गांव से गगन तक की उड़ान — कटनी का लाल, देश का गौरव
अंतरिक्ष विज्ञान में सर्वोच्च योगदान पर अंकुर गर्ग को राष्ट्रपति सम्मान
कटनी। देश का हृदय मध्यप्रदेश की माटी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी महानगर की मोहताज नहीं होती। कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के छोटे से गांव बिछिया से निकलकर अंकुर गर्ग ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में ऐसा परचम लहराया है, जिसने पूरे देश का सीना चौड़ा कर दिया है। अंतरिक्ष विज्ञान में सर्वोच्च और ऐतिहासिक योगदान के लिए अंकुर गर्ग को देश के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य और गरिमामय समारोह में देश की राष्ट्रपति ने स्वयं अंकुर गर्ग को यह सम्मान प्रदान किया। यह केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस मेहनत, जिद और वैज्ञानिक साहस की मुहर है, जिसने भारत को अंतरिक्ष महाशक्ति बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
ग्राम बिछिया निवासी, स्वर्गीय विनोद गर्ग के सुपुत्र अंकुर गर्ग वर्तमान में (इसरो) में पदस्थ हैं। सीमित संसाधनों, ग्रामीण पृष्ठभूमि और तमाम चुनौतियों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान के शिखर तक पहुंचना, सिस्टम पर सवाल उठाने वालों के लिए करारा और ठोस जवाब है—
अगर प्रतिभा को मौका मिले, तो गांव भी गगन चूम सकता है।
अंकुर गर्ग की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल कटनी, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया है। गांव बिछिया से लेकर जिला मुख्यालय तक जश्न और गर्व का माहौल है। लोग एक स्वर में कह रहे हैं—
“यह सिर्फ अंकुर की जीत नहीं, यह गांव-गांव में पल रही वैज्ञानिक क्रांति की जीत है।”
जब देश अंतरिक्ष में नए-नए कीर्तिमान रच रहा है, तब कटनी का यह लाल यह साबित करता है कि भारत का भविष्य सुरक्षित, सक्षम और मजबूत हाथों में है।
कटनी बोली—हमें अपने बेटे पर गर्व है।
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