जबलपुर। गुरुवार रात एक दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। बांध में सैलानियों से भरा क्रूज अचानक पलट गया, जिसमें कई लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते खुशियों का सफर मातम में बदल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, क्रूज में क्षमता से अधिक लोग सवार थे और सुरक्षा इंतजाम न के बराबर थे। लाइफ जैकेट और आपातकालीन व्यवस्थाओं की कमी ने हादसे को और भयावह बना दिया। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही किसकी थी?
प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को ₹4-4 लाख की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए हैं। लेकिन क्या मुआवजा उन जिंदगियों की कीमत चुका पाएगा, जो इस हादसे में खत्म हो गईं?
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, रातभर तलाश
हादसे के बाद प्रशासन और एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की टीमें मौके पर डटी हुई हैं। अंधेरे और गहरे पानी के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। हर गुजरते घंटे के साथ परिजनों की उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं।
कंट्रोल रूम बना सहारा
घटना के बाद जबलपुर कलेक्टर कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
📞 0761-2624355 पर संपर्क कर लोग अपने परिजनों की जानकारी ले सकते हैं।
इंचार्ज के रूप में वीरेन्द्र सिंह को तैनात किया गया है और यह सुविधा पूरी रात चालू रखी गई है।
जिम्मेदार कौन?
- क्या बिना सुरक्षा जांच के क्रूज को संचालन की अनुमति दी गई?
- क्या प्रशासन को पहले से खामियों की जानकारी थी?
- हादसे के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम?
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का कड़वा सच है।
जब तक जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसे यूं ही मासूम जिंदगियों को निगलते रहेंगे।

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